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लोखड़ौन की लहर , कोरोना ने मचाई कहर | Lockdown wave, Corona caused havoc

जीवन का अटल सत्य लोखड़ौन , पहले मौत अब कोरोना 

लोगो को जीते जी मार दिया कोरोना ने

किसी ने कभी सोचा था की ऐसा दिन भी आएगा  जहाँ  पूरी दुनिया के लोग अपने घरो  में  बंद होंगे। और उनकी आज़ादी छीन  जाएगी और उसका जिम्मेदार भी उन्ही को ही ठहराया  जाएगा। 

कभी बचपन में गाय  के बच्चे का मुँह बंदे हुए देखा था लेकिन अब तो ऐसा दिन भी आ गया की हर इंसान का मुँह बंधे हुए देखना पड़  रहा है।  हर एक इंसान की मर्ज़ी से काम नहीं चलेगा। 

एक गलती करता है तो हर किसी को भुगतना पड़ता है।  पुराने दिनों  में कभी सुना था की इंसान  गलतियों का पुतला है और  वो अपनी गलतियों से कुछ न कुछ सीखता भी था ,

लेकिन आज का टाइम तो ऐसा है की वो  गलतिया करे जा रहा है और कुछ सिख भी  नहीं रहा। 

अभी हाल में पता चला है की ऑक्सीजन की कमी भी हो गई है , ऐसा क्यों हो रहा है , आखिर इसमें गलती किसकी है?  और किसकी गलती का नतीजा है ये ? , पहले कभी सुना था की ऑक्सीजन हमें पेड़ – पोधो से मिलती है , अब तो जहाँ  भी देखो मकान ही मकान मिलते है।  लोगो ने अपने स्वार्थ के लिए पेड़ काट – काटकर मकान खड़े कर  लिए।  

जब जब मनुष्य ने कुदरत के साथ खेला है , तब तब कुदरत ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है।  लेकिन मनुष्य है की सिखने को तैयार ही  नहीं !  बस अपनी मर्ज़ी चलाए जा रहा है। 

कही पेड़ काटे जा रहे है , कही इंडस्ट्री लगाई जा रही है , तो कही आग  लगाई जा रही है ।  वो अपने लालच के लिए  निर्दोष लोगो को परेशान  कर रहा है  

इसी सब का नतीजा है की ज्यादातर देशो को  एक बार फिर लोखड़ौन की शकल देखनी पड़ी ,  अगर इंसान चाहे तो ये लोखड़ौन कभी न लगे  जब गलती हमने ही  की है तो हमें ही सुधारनी होगी। हर एक चीज़ हमें जिंदगी  में कुछ न कुछ सिखाती है।   लोखड़ौन ने  भी हमें बहुत कुछ सिखाया ही है।  

प्राकृति पर क्या पड़ा असर? खुले आसमान में उड़े परिंदे —-

एक टाइम था जब हम सुना करते थे  कि जब जब  मनुष्य ने कुदरत के साथ किया खिलवाड़,  तब तब कुदरत ने मनुष्य को दिया मुँह तोड़ जवाब। आज देख भी लिया।  जहाँ  हर जगह तबाही ही तबाही  हो रही थी कही पेड़ काटे जा  रहे  , तो कहीं  पानी को गंदा  किया जा रहा, वही आज प्रकृति  ने सभी को उनके घरो में बंद कर दिया। 

आज एक बार फिर हमे इतना साफ़ मौसम  देखने  को मिला , प्रदूषण   का तो जैसे नामोनिशान  ही मिट गया , क्या कभी किसी ने  सोचा होगा की यू ही खुले आसमान में आज़ादी से उड़ते फिर दिखेंगे  पक्षी। 

जहां पक्षियों को मारा जा रहा था ,और एक बार को तो उनके विलुप्त  होने की  भी बात तक सामने आ गई , वही  आज उनकी ही आवाज चारो ओर चहकती , खिलखिलाहती  दिख  रही है , बिना किसी डर के  खुले आसमान में उड़ते दिखाई दे  रहे है  परिंदे।  

लोखड़ौन छीन रहा है  ,  लोगो  की रोजी- रोटी — 

इस लोखड़ौन ने तो जैसे लोगो को बेसहारा ही कर दिया है । कोरोना वायरस से तो लोखड़ौन बचा लेगा पर इस भूके पेट को कौन  संभालेगा , इस लोखड़ौन में बहुत से लोगो ने खोई है  अपनी नोकरिया।   

कोई  पूरी सुविधा न होने की वजह से काम पूरा और ठीक ढंग से नहीं कर पाए  तो कोई अपना  पूरा – पूरा काम करते हुए भी पूरे  पैसे भी नहीं पा सके । लोखड़ौन से जन्मी ये बेरोजगारी केवल लोखड़ौन तक ही सिमित नहीं बल्कि लोखड़ौन के बाद तक भी लोगो की जिंदगी के साथ –  साथ चलेगी । 

मेंहगाई ने तोड़ी कमर — 

इस लोखड़ौन में सबसे बड़ी मुसीबत जब आई  जब कोरोना जैसी बीमारी  के  कारणों  की वजह से  बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई, और  इससे आर्थिक स्थिति पूरी तरह से तो जैसे  थम सी ही गईं।  और   सब पैसे कमाने  के चक्कर में लोग महगाई करे  जा रहे है। हर चीज़ के दाम बड़ा दिए लोगो ने , एक तो नौकरी नहीं है और ऊपर से महंगाई।  

लोखड़ौन में आयी बच्चो की मौज, युवाओ की मौत  —

लोखड़ौन में जहाँ  बच्चे एक दम मज़े में रह  रहे है न कोई टेंशन न दबाव , वही दूसरी ओर युवाओ के लिए तो एक के बाद एक मुसीबतो का  तो जैसे पहाड़ ही  बड़े  जा रहा है  किसी की नौकरी चली गई , कोई बेरोज़गार है , कोई इस टेंशन में है की घर कैसे चलेगा, कुछ ने तो  अपनों को भी खोया।  

लोगो की आज़ादी छीन रहा है कोरोना —

कोरोना वायरस में लगे इस लोखड़ौन ने तो जैसे  लोगो को अद्रश्य  बेड़ियों से बांध  दिया हो , उनकी  तो जैसे आज़ादी ही छीन ली गई है   ,खुल के साँस नहीं ले सकते , किसी से मिल नहीं सकते ,  कभी  भी अपनी मर्ज़ी से  कही जा  नहीं सकते और कही पर तो क्या  घर से ही बहार नहीं निकल सकते  , और निकलने की कोशिश भी की तो कोरोना आ जाएगा ।  इस कदर डर के साए  में  जी  रहे है लोग

कभी  न  ख़तम होने  वाली है ये बीमारी , जीना होगा इसी के साथ —

अरे ! ऐसे बहुत सी बीमारी है जो ख़तम नहीं होती खांसी  – जुखाम , बुखार, मधुमेह  , टी. बी.  कैंसर ,आदि  इन सब के इलाज तो है लेकिन ये कभी जाती ही नहीं है।  लोगो को अपनी लाइफस्टाइल चेंज करनी होगी।  जब बीमारी हमने  फैलाई  है तो उसे  ठीक भी हमें ही करना होगा।  बस जरूरत है तो अपना जीने का तरीका बदलने की., अपने  लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने की।   

मौसम की है मार , कोरोना कुछ नहीं है यार —

जब – जब मौसम ने करवट ली है , बीमारियों का तांता लगा  है।  मेरे कहने का मतलब है जब जब मौसम बदलता है तब – तब नई बीमारियाँ  जन्म  लेती है। 

इस वक्त अप्रैल चल रहा है और अप्रैल , मई , जून  महीने ही ऐसे है जिनमे  सबसे ज्यादा बीमारियाँ  चलती है।  इन महीनो में थोड़ी गर्मी लगी नहीं की A.C. ऑन हुआ नहीं।

ऐसे मौसम में फ्रिज का ठंडा पानी किसको अच्छा नहीं लगता… मेरे दोस्त । और जब जब हमने ठंडा – ठंडा पानी पिया नहीं ,  तब – तब  गरम – सर्द हुए नहीं और निमोनिया बिगड़ा नहीं।

और इस मौसम में  तो  हम ठन्डे और खट्टे जूस  और ठंडी – ठंडी दही की लस्सी बड़े ही मजे से पिते  है  और यही से शुरू होती  है सर्दी , खांसी , बुखार। 

और रात में तो  मच्चरो ने भी तो तंग कर रखा है , खून पिने के लिए आ जाते है , रात भर सोने नहीं देते।  यही कारण  है  की हमें दिन में  नींद आती है

और यही शुरुवात होती है  कोल्ड कफ़  की … फिर क्या वही बात जो आप लोग जानते ही हो — कोरोना वायरस। 

अरे जब गलती ही हमने की है तो उसे ठीक भी हम ही करेगें . पुराने ग्रंथो में भी  लिखी है ये बाते तो  ( अप्रैल , मई , जून के महीनो में ) दिन में नहीं सोना चाहिए , सोट या अदरक डालकर  गुनगुना  पानी पिए , खट्टी चीज़ो का सेवन न करे , आदि।

   ये और कुछ नहीं है मेरे दोस्त,  ये है मौसम की मार।  

और जानकारी के साथ फिर मिलेंगे।

 To be Continued……

Lockdown the irrevocable truth of life, First death, now… corona

Corona has killed many people till now.

Nobody ever thought that such a day would come, where people from all over the world would be locked in their homes. And their freedom will be taken away and only they will be held responsible. In childhood, I once saw that a cow’s baby was tied, but now the day has come that every human is being seen tied.

Not every work will be done according to us. If one makes a mistake then everyone has to suffer. In the old days, it was heard that man is an effigy of mistakes and he used to learn something from his mistakes, but today the time is such that he is making mistakes again and again. without learning from his mistakes

Recently it has been found out that there is a lack of oxygen as well, why is this happening, whose fault is it? There was a time when we first heard that we get oxygen from trees and plants, now we get buildings wherever we look. People cut down trees and built houses for their selfishness.

Effect on nature? Birds flying in the open sky—

When a man has played with nature, then nature has taught him something. But man is not ready to learn. Just being at their own will. Some trees are being cut, some industries are being planted, then some places where  fire  are being set on (and causing pollution)  He is harassing innocent people for his greed  

The result of all this is that most of the countries had to see the face of lockdown once again, if the person wants, the lockdown will never happen. When we have made a mistake, we have to rectify it. Everything teaches us something in life. Lockdown has also taught us something

Effect on nature? Birds flying in the open sky—

There was a time when we heard that whenever a man played with nature, then nature gave a man a solid punch. Even Look at it today. Everywhere, whenever we go there comes a catastrophe, and….catastrophe in front, where trees are being cut, and water is being polluted somewhere, today, nature has locked everyone in their homes. Today once again, we got to see such clear weather, as pollution is erased, there was a time, where the birds were being killed, today their voice is seen chirping, and flying in the open sky without any fear

Lockdown is snatching the bread of people —

 This Lockdown has left people destitute. well, ok, that’s fine if  Lockdown will save us from coronavirus, but what about the empty stomach? who will handle this hungry stomach, many people have lost their jobs in this lockdown. Due to the lack of complete facilities, if they are unable to complete the work properly and some, even after doing their full work, they could not get the full amount of money. This born unemployment from Lockdown will not only be limited to Lockdown but will also go along with the life of the people even after lockdown (just like hands in hand). 

The expense has broken the waist —

 The biggest problem in this Lockdown came when a large number of people lost their jobs due to reasons like coronavirus, and this completely reduced the economic situation. and in earning money kinda thing, people are rising the priceAlready, people have no job and now these expenses …Huh…

fun for children, fatal  for youth—-

In Lockdown, where children are in a lot of fun, there is no tension, no pressure, but, on the other hand, for the youths, it’s seeming like loads of problems dancing on their heads, Some have lost their jobs, some are unemployed, some are worried about how to run their homes, some have even lost their loved ones.

Corona….snatching the freedom of people —

In this lockdown, it seems like people have been locked up with impregnable fetters, it was like that their freedom has been snatched away, cannot breathe freely, cannot meet anyone, Can’t even party, damn … ugh…  Can’t even go out of our own will and even can’t take a  step out from home and if dare tries to step out, Corona will punch you for sure. and that’s how…  People are living under the shadow of such fear.

This disease is never gonna end, will have to live with it — 

well, many diseases do not end… like a cough – cold, fever, diabetes, TB. Cancer, etc. are all with cures and good treatments, but they never go away. People have to change their lifestyle. When we have spread the disease, we will have to fix it too. All that is needed is to change the way you’re living life. we have to make some changes in our lifestyle.

weather is hitting, the corona is nothing, dude —

– whenever the weather has turned, there is an influx of diseases. I mean to say that when the weather changes – then new diseases are born. At this time, April is going on and April, May, June are the months in which most diseases occur. 

these days, the moment it gets heat and people are like  ( hey, what happened damn it, just turn on the a.c ) and BAM… the A.C. turns on   And  Who does not like drinking the cold water of fridge in such weather, my friend? And when the moment we drink cold & chilly – chill water and then uff…that  “Summer Cold” and pneumonia get worsen

And in this season, we are very happy to drink lassi and those cold and sour juice plus…erm ….cold curd and here starts the journey of cold, cough, fever and blah, blah … Even at night, the Mosquito has kept it tight, they just come to suck our blood…uh…, they don’t let us sleep throughout the night. ( god ! these months …hard to pass …isn’t it? )

passing the night with those sucky mosquitoes …huh… sure didn’t let you sleep last night and just because you don’t want that ugly dark circles on your face so, Da…Da…This is the reason why we get sleepy during the day and this is the beginning of cold phlegm and then the same thing you know — Coronavirus..ugh… well, if we have made a mistake, then we will have to fix it too. It is also written in the old texts that in the months of  (April, May, June)… One should not sleep during the day, add saute or ginger, drink warm water, do not consume sour things, and blah blah… And.. at the end would like to add something that …This is nothing, my friend, this is just the slap of the season.   

See you again with more information. …
   To be Continued…  

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